
नमन मंच
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विषय:–हरियाली भी तिरंगी हैं।
विधा:–कविता
शीर्षक:–सैनिक और किसान
सुहाना मौसम आया हैं।
खुशियों का रंग लाया हैं।।
हरी भरी हुई धरा इंद्रधनुषी आसमां।
यौवनता नदियाँ में आई
केसरिया रंग छा गया।।
भारत माता के आँगन में
पुलकित हर सुमन हुआ।।
लहरायें चरणों में सागर
गोद में छायें हरियाली
लहरायें मस्तक पर तिरंगा
शान बढ़ायें भारत माँ की
हरियाली भी है तिरंगी।।
भारत माँ के दोनों लाल
सैनिक और किसान
खेत और सीमा पर बढ़ा रहें हैं शान
खून पसीना से सींच धरा
हरा भरा करें धरती
शीश अपना अर्पण कर
रक्त से करें अभिषेक
एक पसीना एक लहूँ से रंगे धरती।
शक्ति धैर्य और खुशहाली की धाती
धरती बनी तिरंगी हैं।
हरियाली भी तिरंगी हैं।।
स्वरचित:–डॉ अनुपम भारद्वाज मिश्रा




