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सावन पूर्णिमा-भाई बहन का प्यार

सावन पूर्णिमा-भाई बहन का प्यार

 

सावन की पूनम आई, लेके राखी का त्योहार,

रक्षाबंधन पर्व होता है,भाई बहन का अटूट प्यार।

 

रेशम की इस डोरी में, बंधा है प्रेम का जीत अपार,

भाई-बहन का रिश्ता है,पावन पवित्र बहता हुआ धार।

 

बचपन की है वो यादें,थोड़े में झगड़ा वो तकरार,

एक खिलौने के खातिर,पल में रूठना पर में प्यार।

 

माँ के आँचल में लिपटे,जब हम सो जाते थे साथ,

आज वही माँ देख रही, उठा रही आशीष का हाथ।

 

भाई तो है वो बरगद, जिसकी छाया होती है घनी,

बहन चाहे जहाँ भी जाए,भाई का ही दुनिया बनी।

 

भाई तू कमाए, तू लड़े, पर घर की लाज बचाए रखना,

बहन भले पराई हो जाए, दिल में सदा बसाए रखना।

 

राखी बाँध रही हूँ भाई, कोई और कोई बंधन नहीं,

तेरे सुख-दुख की साथी हूं, मैं

ये रिश्ता गहन बड़ी।

 

विनय के थाली में भैया, श्रद्धा सुमन ये अर्पित है,

बांध रही हूं राखी भैया, स्नेह का राखी समर्पित है।

 

जीवन में मिठास घुली रहे करूं ईश्वर से प्रार्थना,

रक्षाबंधन प्यारा बंधन, अटूट प्रेम की साधना है।

 

राखी के धागे का बंधन, होता है अति अनमोल,

भाई-बहन के प्रेम, त्याग का, नहीं होता कोई तोल ।

 

ये केवल धागा ही नहीं, ये तो वचन का सार है,

भाई-बहन का प्यार ही, दुनिया का आधार है।

 

भाई बहन का प्रेम जहां, वहां मेरा हो घर आंगन,

श्रावण पूर्णिमा भाई-बहन का अटूट बंधन रक्षाबंधन। 

 

  चन्द्रकला शर्मा 

   प्रधान पाठक 

बेमेतरा छत्तीसगढ़

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