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विषय: आजादी

विषय: आजादी

 

_ अंजली सामंत, महाराष्ट्र_

 

डेढ़ सौ वर्षों तक हम अंग्रेजों के अधीन रहे।  

वर्ण-व्यवस्था में विभाजित होकर आपस में संघर्ष करते रहे।  

पाश्चात्य शिक्षा से हमारे विचारों का अंधकार दूर हुआ।  

तब स्वतंत्रता के लिए क्रांति का उद्घोष हुआ॥1॥

 

लोकमान्य तिलक क्रांति के अग्रदूत बने।  

उन्होंने चापेकर बंधुओं को प्रेरणा प्रदान की।  

लाल, बाल, पाल ने मिलकर  

क्रांति की दुंदुभि बजाई।  

वे हँसते-हँसते फाँसी के फंदे पर झूल गए।  

उनके रक्त से सहस्रों क्रांतिकारी उत्पन्न हुए॥2॥

 

वीर सावरकर ने विदेश से क्रांतिकारी साहित्य भेजा।  

नेताजी सुभाषचंद्र बोस ने बर्मा में आजाद हिंद फौज का गठन किया।  

9 अगस्त 1942 को महात्मा गांधी ने ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ का आह्वान किया।  

गांधी जी को कारागार में डाल दिया गया।  

किंतु जनता ने क्रांति की ज्वाला को घर-घर तक पहुँचाया॥3॥

 

स्वतंत्रता संग्राम में भारत ने विकराल रूप धारण किया।  

‘वंदे मातरम्’ के जयघोष से संपूर्ण धरा गूंज उठी।  

असंख्य अज्ञात शहीदों के बलिदान से हमने स्वतंत्रता प्राप्त की।  

कारागारों में अंग्रेजों के अमानवीय अत्याचार सहन किए।  

कालापानी की कोठरी में सावरकर ने ‘स्वातंत्र्य-देवता’ नामक काव्य की रचना की॥4॥

 

देशवासियों ने विद्यालय त्यागे, घर-बार छोड़ा।  

लाठियाँ और गोलियाँ झेलीं।  

जनरल डायर नामक राक्षस ने जलियाँवाला बाग में रक्त की नदियाँ बहाईं।  

आज हम समस्त शहीदों को श्रद्धापूर्वक नमन करते हैं।  

भारत के वीरों और क्रांतिकारियों को शत-शत सलाम॥5॥

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