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शीर्षक -मेरी माटी,मेरा देश।

शीर्षक -मेरी माटी,मेरा देश।
दिनांक 07/08/26
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मेरी माटी, मेरा देश जैसा,
धरा में कोई देश नहीं है।
पर्वतराज हिमालय प्रहरी बन,
सदियों से अटल खड़ा हुआ है।
गंगा, यमुना, सरयू जल दे,
अमृत जल को बहा रही हैं।
जिस देश की माटी चंदन सी,
हम उसका तिलक लगाते हैं।
भारत का हर बच्चा-बच्चा,
जय-हिंद वंदेमातरम् बोला है।
सुभाष,भगत, आजाद ने,
देश लिए अपना जीवन वारा है।
अपनी मातृभूमि के खातिर,
देश का हर सपूत कुर्बान है।
वीर जवानों की पावन धरा यह,
उनको कोटि -कोटि वंदन करते हैं।
मेरी माटी, मेरा देश जैसा—
धरा में कोई देश नहीं है —
सुषमा सिंह*उर्मि,,
कानपुर




