शीर्षक आओ, आज़ादी का जश्न मनाएँ

15, अगस्त पर रचना प्रस्तुत कर रही हूं।
शीर्षक
आओ, आज़ादी का जश्न मनाएँजलयानों से भरे
आसमाँ के नीचे,
एकजुट होकर एक
साथ कदम बढ़ाएँ।
चहुँओर तिरंगा लहराए,
खुशियों की बौछारें छाएँ।
आओ, आज़ादी का जश्न मनाएँ।देश की उज्ज्वल कहानी गाएँ,
वीरों के बलिदानों को
अंतर्मन से याद करें।
अखंड भारत भारत देश को जाने।
आओ, आज़ादी का जश्न मनाएँ।सच्चाई, सादगी और सफ़ाई के मंत्र से,
नव-निर्माण का संकल्प लें, निर्मल बनें।
सच्ची आज़ादी को पाने हेतु
आत्मा और शरीर से पावन बनें।
आओ, आज़ादी का जश्न मनाएँ।‘तू’, ‘तुम’, ‘मैं’ और ‘मेरा’ कहते-कहते
उलझ गए हैं अंतर और बाह्य युद्ध में।
सब कुछ स्वाहा हो जाएगा इस ज्वाला में,, ज्ञान और योग का बिगुल बजाएँ।
आओ, आज़ादी का जश्न मनाएँ।मेरा भारत देश महान है,
सनातन संस्कृति और देव-परंपरा का
पावन आधार है।
जटिल चुनौतियों से जूझकर भी
सोने-सा दमकता राष्ट्र है।
मत भूलो, भारतवासियो,
भारत विश्व का पथ-प्रदर्शक है।
आओ, आज़ादी का जश्न मनाएँ।भगवान की अवतरण-भूमि पर,
अनेकता में एकता के दर्शन पर,
नाज़ है तिरंगे चक्रधारी ध्वज पर,
गर्व है हमें देश के कर्णधारों पर।
आओ, मिलकर राष्ट्रगौरव का मान बढ़ाएँ।
आओ, आज़ादी का जश्न मनाएँ।अमिता मराठे
लेखिका एवं समाज सेविका
इंदौर मध्य-प्रदेश




