
गीत सृजन
मुखड़ा :
सावन की पावन घड़ियाँ, महक रही संसार में।
भैया मेरे जल्दी आना, राखी के त्योहार में।
नैन बिछाए राह निहारूँ, मन में उमंग समाई है।
राखी, रोली, अक्षत लेकर, बहना द्वार सजाई है।
तेरे आने से ही खिलते, सपने मेरे प्यार में।
भैया मेरे जल्दी आना, राखी के त्योहार में।
बचपन की वो मीठी बातें, मन को आज रुलाती हैं।
हँसना-रोना, रूठना-मनना, याद बहुत ही आती हैं।
हर इक पल मुस्काए जीवन, तेरे ही सत्कार में।
भैया मेरे जल्दी आना, राखी के त्योहार में।
रक्षा-सूत्र की डोर अनोखी, प्रेम-सुधा बरसाती है।
भाई-बहन के पावन रिश्ते, जग को राह दिखाती है।
सदा अटल यह स्नेह रहे, हर जन के परिवार में।
भैया मेरे जल्दी आना, राखी के त्योहार में।
ईश्वर से बस यही प्रार्थना, खुशियाँ तेरे द्वार रहें।
दीर्घायु हो, यश बढ़ता जाए, जीवन में उपहार रहें।
स्नेह अमर हो जन्म-जन्म तक, इस पावन संसार में।
भैया मेरे जल्दी आना, राखी के त्योहार में।
सावन की पावन घड़ियाँ, महक रही संसार में।
भैया मेरे जल्दी आना, राखी के त्योहार में।
स्वरचित
डाॅ सुमन मेहरोत्रा ‘सुरभि’
मुजफ्फरपुर, बिहार




