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“प्रेम का धागा”

प्रेम का धागा दो दिलों का नहीं बल्कि एक परिवार को जोड़ता है एक समाज को जोड़ता है या यूं कहूं पूरे देश को जोड़ता है देश की भाषा संस्कृति और परंपराएं इस धागे के अलग-अलग रंग है अलग-अलग प्रदेश के लोग राष्ट्र प्रेम नाम के धागे में एक साथ बंध जाते हैं तिरंगा इस प्रेम का प्रतीक बन जाता है और देश का हर सैनिक अपना समर्पण दिखाकर, नागरिक अपनी एकता और भाईचारा का भाव दिखाकर राष्ट्र प्रेम धागे को और मजबूत बना देता है उसी की कड़ी में धागा भाई बहन का भी होता है जो एकता और बंधुता का प्रतीक है बचपन को याद करने का प्रतीक है सुख-दुख को साझा करने का प्रतीक है इसी से संबंधित एक दो पंक्तियां सुनते हैं 

 

संबंध एक डोर है प्रेम है उसका नाम इसके हर एक तंत्र से मिलता प्यार सम्मान।।

 

रक्षा सूत्र नाम है इसका भाई बहन का त्यौहार 

हंसी ठिठोली सब एक जगह भरा पूरा परिवार।।

 

तिरंगा नाम है प्रेम का भारत मां का सम्मान। हम सब का समर्पण राष्ट्र प्रेम के नाम।।

हैप्पी रक्षाबंधन इस पवित्र रक्षा सूत्र की डोरी में सब बंध कर अपने प्यार विश्वास के संबंध को नई आशा दें।

लेखिका 

दुर्गावती (दुर्गा नलिन) राणा संग्राम सिंह इंटर कॉलेज बिसाहड़ा गौतम बुद्ध नगर उत्तर प्रदेश

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