15 अगस्त स्वतन्त्रता दिवसE-Paperसाहित्यिक गतिविधियां

लहू से लिखी आज़ादी की दास्ताँ रहे,  

लहू से लिखी आज़ादी की दास्ताँ रहे,  

शहीदों के जुनूँ का दिलों में निशाँ रहे।

 

सरहद पे जो जागे वो हर पहरेदार की आँख,  

उनकी वफ़ा का हर ज़र्रे में गुमाँ रहे।

 

वतन की ख़ाक भी महफ़ूज़ रहे उम्रभर,  

हर एक दिल में तिरंगे की आबरू रहे।

 

हवा भी जब चले तो वंदे मातरम् गाए,  

बच्चे-बच्चे की ज़ुबाँ पर हिन्दुस्ताँ रहे।

 

जिन्होंने जान लुटाई वतन की राहों में,  

उनकी क़ुर्बानी का सदा एहतराम रहे।

 

मांएं जिनके चिराग़ बुझाकर सोईं चुपचाप,  

उनकी गोद का उजाला सदा जहाँ रहे।

 

नफ़रत की आँधियाँ मिटती रहें जहाँ से,  

हर दिल में मोहब्बत का एक पैग़ाम रहे।

 

मंदिर-मस्जिद-गुरुद्वारे सबकी आरती एक हो,  

गंगा-जमुनी तहज़ीब का सदा मान रहे।

 

महकता रहे गुलिस्ताँ मेरा यूँ ही सदा,  

मेरे हिंद पर हमेशा ख़ुदा का करम रहे।  

मेरे भारत की आन-बान-शान सदा सलामत रहे। 🇮🇳

लेखिका 

शबीहा कौसर सीमा 

मुंबई महाराष्ट्र

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