दुर्जेय —–तिलक

दुर्जेय —–तिलक
केशव युग उद्धधारक
कलियुग मे सत्य
प्रतिनिधि प्रतिबिम्ब
प्रकाश!!
निर्मल नीरझर निर्मल
अविरल नित्य निरंतर
प्राणी प्राण प्रवाह!!
चंदन माटी पानी सुगंध
मस्तक तिलक अभिमान
लोक कल्याण परमार्थ
लोक मान्य बाल गंगा धर
तिलक सत्यार्थ!!
कर्तव्य दायित्व बोध
बोध सत्य है स्वतंत्रता
जन्म सिद्ध अधिकार!!
खंड खंड बटे रियासत
खंड खंड मे विभाजित
जन मानस तृण से भी
जैसे प्राण हीन समाज!!
आदि अनंत सनातन
अस्तित्व बिहीन लड़ते
झगढ़ते आपस मे
अशिक्षित अनपढ़ गंवार!!
नर हो गया था जैसे वानर
शासक बटता रोटी निगल
जैसी बिल्ली चालाक जाता
स्वंय श्रम परिश्रम वानर का
व्यर्थ वेकार!!
जन्मा निरीह प्रताड़ित
परतंत्र परिवार समाज का
आशा विश्वास केशव बाल
गंगा धर तिलक रत्नगिरी
महाराष्ट्र!!
वकील शिक्षक पत्रकार
समाज सुधारक प्रतंत्रता
पर प्रहार पराक्रम स्वतंत्रता
मानव जन्म सिद्ध अधिकार
शांखनाद!!
अक्षय अक्षुण सत्य सनातन
स्वर कया कर्म का नायक
काल समय महानायक गंग
गणेश का आवाहक!!
गणेश उत्सव शुभारम्भ के
शुभ आचार्य दूरदर्शी माँ
स्वतंत्रता मशाल से माँ
भारती कि आरती करता
चेतना जाग्रति जागरण
प्रकाश!!
केशव बाल गंगाधर
प्रेरक प्रेरणा अजेय
दुर्जेय शक्ति साहस
निरीह जन का रक्षक
सिँह जन्मेजय तुम्हे
प्रणाम!!
नंदलाला मणि त्रिपाठी पीताम्बर गोरखपुर उत्तर प्रदेश!!




