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बचपन की वो मीठी यादें 

बचपन की वो मीठी यादें 

बचपन की वह मीठी यादें 

वह नन्ही सी नादानियां 

याद आती है बहुत 

वह भोली सी शैतानियां 

वह मां का आंचल और 

पापा की उंगली थामे,

चलना, गिरना और फिर संभालना 

वह नन्ही हथेलियां से जाकर मुस्कुराना,

वह टिमटिमाते तारों को पकड़ने की आस में, 

आसमान को यूं एक टकदेखते रहना,

और न पाकर उन्हें मायूस सा हो जाना,

वह नन्हे हाथों से मिट्टी का घरौंदा बनाना 

वह बारिश की फुहार से खुद को भिगोना,

और घर आकर मां की डांट खाना 

लेकिन अगले ही पल एक प्यारी सी मुस्कान पर 

मां के गुस्से का गायब हो जाना, 

वह नए-नए खिलौने लाना और अपनी गुड़िया से बातें करना, 

वह आइसक्रीम और चॉकलेट कि अपने बड़ों से फरमाइश करना, 

अपने घर की दीवारों को सजाना 

तुतलाती हुई आवाज में नई-नई कविताएं सुनाना 

ओ भोली सी सूरत बनाकर अपनी हर जिद मनवाना,

वह निगाहों से अनकही बातें बताना बचपन की वह मीठी यादें वह बीताहर लम्हा ,याद आता है बहुत ,जब होती हूं तन्हा, बचपन की वह मीठी यादें, याद आती है बहुत।।

श्वेता ईनाणी ,उदयपुर ,लेखिका

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