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किसान मजदूर

किसान मजदूर

 

कलम तुम आज उनकी जय बोल।

जो दिन भर कठिन परिश्रम करके मेहनत मजदूरी करते।

पेट फिर भी न अपना भर पाते।

तन पर नहीं कपड़ा, न मन में कोई सुकून, फिर भी जी रहे।

 

छोटे-छोटे बच्चों की न पूरी कर पाते उनकी इच्छाएँ।

कलम तुम आज उनकी जय बोल।

छोटे-छोटे किसान खेतों में काम करते।

कभी सूखा कभी बाढ़, फसल को बर्बाद कर देते।

 

उनकी स्थिति को महसूस करके बोल मन से।

कितनी परेशानी झेलनी होती है उन्हें।

कलम तुम आज उनकी जय बोल।

जो कर्ज ले कर खेतों में खाद देते।

 

उनको कैसे पैसा चुकाएं, यह सोच-सोच कर बेचैन हो रहे।

कोई दूसरा कर्ज फिर देना नहीं चाहते।

कलम तुम आज उनको जय बोल।

ऐसी विषम स्थिति में वो क्या करे।

 

घर पर भी बीबी बच्चों की आवश्यकताओं की पूर्ति कैसे करें।

रोज रोज घर के इस झगड़े को कैसे सुलझाएं।

कलम तुम आज उनकी जय बोल।

एक दिन भी पेट भूखे रह न सकें।

 

पेट की पूर्ति के लिए कैसे जुगाड़ करें।

बाल-बच्चों की शिक्षा दीक्षा कैसे पूरी करें।

इन सभी समस्याओं को कैसे निबटे।

कलम आज उनकी जय बोल।

 

अगर सरकार उचित खाद पानी बीज का उत्तम प्रबन्ध करे।

बड़े और छोटे किसान में असमानता न करें।

“फसल बीमा योजना” लागू करें सभी के लिए।

तब कुछ राहत मिल सकती किसानों के।

 

कलम तुम आज उनकी जय बोल।

जय हो, जय हो, जय हो, भारत के किसानों के।

 

– नीलम प्रभा सिन्हा

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