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रक्षाबंधन

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हस्त-सुशोभित राखियाँ, रंग बिरंगी आज।
प्रेम-पूर्ण इस पर्व की, रखना भाई लाज।।
आनंदित मन से सदा, रखना सबका ध्यान।
भाई तेरा विश्व में, बढ़े सदा ही मान।।
पावन पर्वों में बड़ा, रक्षाबंधन पर्व।
भाई करना कर्म वह, करूँ सदा ही गर्व।।
मात-पिता अरु ईश का, पाना आशीर्वाद।
हो तेरा जीवन सदा, खुशियों से आबाद।।
सावन की यह पूर्णिमा, लाया है उल्लास।
मिलकर खुशियाँ बाँट लें, भूलें सब संत्रास।।
रक्षाबंधन बाँधकर, बहिन दे रही नेह।
अभिनंदन में आज फिर, बरस रहे हैं मेह।।
रेशम डोरी आस की, सिखलाते संस्कार।
बहन-बंधु के मेल का, यह पुनीत त्योहार।।
-द्रौपदी साहू
छुरी कला, कोरबा, छत्तीसगढ़




