ऐसे थे हमारे स्वतंत्रता सेनानी
- (कविता/काव्य तरंग)
“आप सभी मित्रों एवं साथियों तथा प्यारे बच्चों को हमारी ओर से स्वतंत्रता दिवस की ढेर सारी अग्रिम शुभकामनाएं एवं अशेष बधाइयां।“
बड़े निडर होते थे हमारे स्वतंत्रता सेनानी,
अंग्रेजों को बार बार याद दिलाते थे नानी।
वे अपनी जान की चिंता नहीं करते कभी,
अंग्रेजों को बात बात में पिलाते थे पानी।
बड़े निडर होते थे………..
अपनी जान को हथेली पर लेकर चलते थे,
वे दीवाने सदा परवाने की तरह जलते थे।
टूटना या झुकना, मंजूर नहीं था बिल्कुल,
रोज लिखते, रोज मिटा देते अपनी कहानी।
बड़े निडर होते थे………….
युद्धवीरों की तरह होते थे उनके व्यवहार,
दिल में बंदूक उनके, दिमाग में तलवार।
अग्निपथ पर चलने में ही मजा आता था,
वे जानते थे बेईमान अंग्रेजों की बेईमानी।
वे बड़े निडर होते थे………
हम सभी आज आजाद हवा में जी रहे हैं,
उन स्वतंत्रता सेनानियों की है मेहरबानी।
हम भारतीय तिरंगा को बहुत प्यार करते,
इसके लिए उठा सकते कोई भी परेशानी।
वे बड़े निडर होते थे……….
प्रमाणित किया जाता है कि यह रचना स्वरचित, मौलिक एवं अप्रकाशित है। इसका सर्वाधिकार कवि/कलमकार के पास सुरक्षित है।
सूबेदार कृष्णदेव प्रसाद सिंह,
नासिक (महाराष्ट्र)/
जयनगर (मधुबनी) बिहार




