संत तुलसीदास-रामभक्ति के अमर साधक

संत तुलसीदास-रामभक्ति के अमर साधक
काशी की पावन धरती पर जन्मे, तुलसीदास महान,
राम-नाम की भक्ति से, बढ़ाया जग का मान।
बाल्यकाल से राम-भजन में, मन उनका रम जाता,
दुख की आँधी में भी उनका, विश्वास न डगमगाता।
माँ का साया शीघ्र छूटा, जीवन में था शोक,
रामभक्ति की ज्योति जली, मिटे सभी संताप।
मोह-ममता के बंधन टूटे, जागी भीतर ज्योति,
राम चरण में मन लगाकर, त्यागी जग की भ्रांति।
चित्रकूट की पावन धरती, बनी साधना धाम,
अंतर में बस एक ही गूँजा, मर्यादा पुरुषोत्तम राम।
हनुमत कृपा से राम-दर्शन का, पाया अनुपम ज्ञान,
भक्ति-भाव से रच डाला, रामचरितमानस महान।
घर-घर पहुँची रामकथा, मिटा अज्ञान अँधेरा,
प्रेम, नीति और भक्ति से, जगमग हुआ सवेरा।
विनयपत्रिका, कवितावली, काव्य-सुधा के धाम,
संत तुलसी ने जन-जन को, सौंपा भक्ति का नाम।
हिंदी भाषा को गौरव देकर, अमर किया साहित्य,
तुलसी की वाणी आज भी, देती जीवन को सत्य।
रामभक्ति के दीप बने वे, युगों-युगों तक जलते,
तुलसीदास अमर रहेंगे, जब तक जग में प्राण हैं चलते।
स्वरचित
डाॅ सुमन मेहरोत्रा ‘सुरभि’
मुजफ्फरपुर, बिहार




