साहित्यिक गतिविधियां
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“चलते रहो पथिक”
01/08/26, शनिवार “चलते रहो पथिक” ================ ए पथिक ! तुम रुक न जाना….. धूल लगे तो पांव…
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मैं क्या चाहूँ सावन में
मैं क्या चाहूँ सावन में रिमझिम-रिमझिम मेघा बरसे, तन भीगे, मन तरसे। देख-देख प्रकृति की शोभा, जियरा मेरा हरषे।…
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दिल्ली के ‘चलो संसद’ विरोध प्रदर्शन : छात्रों की आवाज़, न्याय और लोकतंत्र
दिल्ली के ‘चलो संसद’ विरोध प्रदर्शन : छात्रों की आवाज़, न्याय और लोकतंत्र दिल्ली में हाल ही में हुए ‘चलो…
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शीर्षक प्रेम गान
दिनांक 21.7.26 शीर्षक प्रेम गान प्रकृति के आनंद-वन में, वसुंधरा का अनुपम श्रृंगार। वनमाली की कोमल भावनाएँ, गा रही…
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तेरी चुनरिया की छांव
तेरी चुनरिया की छांव तेरी चुनरिया की छांव में, मुझे दुनिया की खुशियां मिली, जीवन में धूप चाहे तेज रहे,पर…
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आषाढ़ के बादल
आषाढ़ के बादल डॉ. अंजली सामंत, डहाणू “आषाढ़स्य प्रथम दिवसे” कालिदास स्मरण आए। विरह की पीड़ा मन में छाए। विरहिणी…
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घूमड़े काली बदरिया
घूमड़े काली बदरिया घूमड़े काली बदरिया देखो, छाई घटा अति घनघोर, पवन चले पुरवईया सुंदर,मनवा झूमे नाचे मोर, धरती प्यासी…
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नारी के अरमान
नारी के अरमान डॉ. अंजली सामंत समाज के हर वर्ग में नारी को आज भी वस्तु समझा जाता है।…
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आषाढ़ मास की रिमझिम फुहार
आषाढ़ मास की रिमझिम फुहार आषाढ़ आया, बादल छाए, रिमझिम पानी बरसाएं, धरती मां की प्यास बुझाए हर…
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गीत सृजन
गीत सृजन मुखड़ा रिमझिम बरसे मेघ रे, कुदरत की सौगात। अब तो आजा साँवरे, कर लूँ दिल की बात।।…
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