15 अगस्त स्वतन्त्रता दिवससाहित्य रचना
विषय:–लहूँ से लिखी आजादी की दास्तां

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विषय:–लहूँ से लिखी आजादी की दास्तां
विधा:–गीत
शीर्षक:–आजादी के दीवाने
जंजीरों से जकड़ी थी
हमारी प्यारी भारत माँ
लहूँ से वीरों ने लिखी
आजादी की दास्तां।।
खाई सीने पर गोली
खेली खून की होली।
माँओं ने बेटा खोया गोद हुआ सूना।
बहना की खाली राखी सूना हुआ अँगना।।
सिंदूर मिटा घर उजड़ा
मलिन हुआ न चेहरा।।
आजादी के पथ पर निकलें
आजादी के दीवानें।
सर्वस्व लुटाने शीश चढ़ाने
माँ को मुक्त कराने।।
भारत माँ के लाल निकलें
अपने शीश पर बाँध कफन
न खुशियों की चाहत
न गम था दर्द का।
बस एक ही धून सवार था
आजाद कराना देश हैं।।
अँग्रेजों के जुल्मों सितम
सहते रहें मुस्कुराते रहें
गीत आजादी के गाते रहें
हर वाणी में बोल रहे थे इंकलाब की बोलियाँ।।
हँसते हँसते सूली पर चढ़कर
लिख दी नयी दास्तां।।
वीरों ने लहूँ से लिखी आजादी की दास्तां।।
स्वरचित:–डॉ अनुपम भारद्वाज मिश्रा




