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आखो में समंदर

आखो में समंदर

 

आॅंखो में समंदर है सपनों का।

तुने बचपन में बाॅंध दिया मुठ्ठीमे।

तूफान में चल रहे है।

माॅं के आॅंखो में वत्सलता का समंदर।

गुरू के आॅंखो में ज्ञान का समंदर।

प्रितम के आॅंखो में प्यार का समंदर।

कुछ समंदर अंधकार भरे,हिंस्रता,असत्य,अनिती,अनाचार,भ्रष्टाचार भरे समंदर मे जीते

डूब के मर रहे है।

राजनिती का काले पैसोसे भरा समंदर जिसका थांग नही है।

गरीब पानी,बिजली,मकान,अन्न के प्यासे धुॅंड रहे है मूलभूत अधिकार का समंदर।

नारी के हिंसा का समंदर खून से भरा।

 

इराण की होर्मुझ समंदरधुनी

आग्नि भरी युध्दविराम के लिए तरस रही है।

सारा जग का व्यापार थामे जल रही है आजादी के लिए तरस रही है होर्मुझ समंदरधुनी।

 

समंदर शोक मना रहा है।क्यों मेरा जीना हराम कर रहे है।

समंदर को मानव अपने काबू में ले रहा है।

हे भगवान ! मेरा सुंदर,शुध्द,पवित्र समंदर बचा दो।

मेरे दिल में आसमा बसा दो!

आज जग को बुध्द के करुणा भरे नेत्र में डूबा दो..

शिव के विशाल नेत्र में समा दो।

ॠषियों होर्मुझ समंदरधुनि को पी डालो।

प्रकृति को मत बाटो धर्म,जात-पात से।

मै समंदर अथांग,अनंत,चंचल,सारा दुःख मुझे देदो।

जग में शांति ,आनंद,सूख दे दो!

हे इस्रायल,अमरिका,इराण मुझे स्वतंत्रता,शांति,सूख दे दो!

समुंदरधुनि को बुध्द की प्रतीक्षा है।

वसुधैवकुटुंबकम् की होर्मुझ में बरसात कर दो।

कोई भी देश के लोग नही मरें गे,

इराण की लडकीयों का क्या कसुर था?

बाॅंम से पाठशाला उडाकर क्यों जनम देने वाली माॅं का विनाश करते हो।

प्रकृति किसी के बसकी नही होती।

महाप्रलय एक न एक दिन आना है।

‘मै ही आदि हूॅं ,मै ही अंत हूॅं’

विज्ञान,विकास और विनाश मर्कटो के हाथों में खिलोना बन गये है।

मै होर्मुझ समंदरधुनि खामोश अपना ही तमाशा देख रही हूॅं।

 

‘युध्द नही हमें बुध्द की प्रतीक्षा है।

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