E-Paperसाहित्य रचना
नयनों की भाषा

नयनों की भाषा ——– नयनों की बातें नयनों को नयनों से ही करने दो।
भीगे हुए शब्द नयनों के
एक दूजे के अंतर्मन में उतरने दो।
नयन जल से मन भिगो कर मन की कलुष अब छंटने दो।
प्रेम पनपे मन में जो तो मुस्कुराहट नयनो पर चढ़ने दो।
नयनों की भाषा बहुत विशाल है।
शब्दों से ज्यादा करती कमाल है।
नयन जो उलझे दूजे नयन से
नयन झुका कर सुलझने दो।
मूंद लो नयन अपने प्रियतम को
उसमें बसने दो।
नयन ने क्या बोला है नयन से
दोनों को ही समझने दो।
बहुत से प्रश्न छुपे हैं नयन में
उत्तर नयन को देने दो।
नयन नयन का मधुर मिलन है
नयन नयन को मिलने दो।
मधु वशिष्ठ फरीदाबाद हरियाणा




