“हरि की कृपा”

“हरि की कृपा”
जब हरि की कृपा बरसती है,
कांटों में भी फूल खिलते हैं।
सूखी नदी में बाढ़ आ जाए,
दुखियों को खुशी मिलते हैं।
बंद रास्ते भी खुल जाते हैं,
जब हरि की कृपा होती है।
मां की ममता, पिता का लाड़,
जीवन में सपने संजोती है।
जिस पर श्याम की नजर पड़े ,
उसका उद्धार ही हो जाए।
खाली झोली भर जाती है,
टूटा दिल फिर से मुस्कुराए।
तूफान आए लाख सही,
तेरा हाथ मेरे सिर पर हो,
आंधी में भी दीप जले प्रभु,
मेरे साथ में श्री हरि हर हो।
हरि तुम दीन दयालु हो,
करुणा के तुम अवतारी।
एक बार जो शरण में आए,
सारे संकट को पल में टारी।
लंगड़ा चले, गूंगा भी बोले,
बधिर सुने,बांझ पुत्र पाये।
निर्धन को धन,कोढ़ी को तन,
हरि कृपा से जीवन पाये।
कृपा बरसाते करुणा मय,
हरपल हरक्षण जीवनभर,
पशु-पक्षी, जीव-जंतु भी,
कृपा बिनु नहीं करें सफर।
ना मांगू धन,महल,अटारी,
बस तेरी कृपा का कण दे,
तेरी कृपा की माला जपूं,
जीवन भर हर क्षण क्षण में।
चन्द्रकला शर्मा
प्रधान पाठक
बेमेतरा छत्तीसगढ़




