E-Paperकविता

मेरी एक कविता

शुभ प्रभात 

मेरी एक कविता

 

ऐ बसन्त आ जाओ

 

आज अमराईयो मे भी

महक उठी है मंजरिया ।

तुम आने वाले हो

यह जान गई होगी सारी कलिया ।

फूल खिल खिल कर 

बिछ गई होगी रास्ते मे कलिया ।

कोयल की मीठी मधूर बोली

सुना के कुहू कुहू कुक रही होगी ।

हर डालिया उत्सुक होगी

शृंगार करके पत्ती का हार पहन कर ।

तेरे आने के इंतजार मे

आज मौसम भी बहुत हंसी दिखती ।

दिल करता किलकारिया 

दिल मे उमंगे दिल मे तरंगे ।

करने लगी आज अठखेलिया

मन भी खुस दिल भी खुस ।

नजर आती सारा जहान खुस 

मनाए हम सब भी रंगरेलियां ।

ऐ बसन्त अब किस बात की है देरी ।

आजा आ भी जा इंतजार बहुत हो चुकी 

आओ मिल कर खेले आखं मिचौनी ।

नीलम प्रभा सिन्हा 

धनबाद झारखंड

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!