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मनहरण घनाक्षरी

देश भक्ति

मनहरण घनाक्षरी

(8-8-8-7 वर्ण)

देश भक्ति

 

आन -मान शान- शक्ति,भाव प्यार देशभक्ति,

परंपरा ज्ञान युक्त, गरिमा बढ़ाइए।

 देश भक्ति छंद गीत,रचें सभी कवि मीत, 

जन हित भावना में,प्रेम राग गाइए।

सर्व विधि संविधान, देश मेरा है महान,

भेद- भाव दूर कर,वैर भूल जाइए।

विविधता में एकता,अखंडता में समता,

भारती की लाज हित,कदम मिलाइए।

 

 

राष्ट्र गान जन -गण, देश भक्ति जन- मन,

लहरे तिरंगा ध्वज, सबका गुमान हो।

विकास की ओर बढ़ा,देश भक्ति भाव अड़ा,

दुर्बल का मान रख,कर्तव्यों का भान हो।

भारत के युवा वीर, धरते हैं शौर्य धीर,

संरक्षक हैं सीमा के,सत्य के विधान हो।

जय किसान बोल के,प्रेम रस को घोल के,

जय विज्ञान घोष हो,भारत की शान हो।

 

स्वरचित 

डाॅ सुमन मेहरोत्रा ‘सुरभि’

मुजफ्फरपुर, बिहार

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