शब्दों की महफ़िल, दिलों का संगम

शब्दों की महफ़िल, दिलों का संगम
शब्दों की महफ़िल, दिलों का संगम,
तुम्हारे मीठे शब्द बन गए मेरे मन का सरगम।
मेरे दिल की खामोशी को भी सुर मिल गया,
दिल के कोने में छुपा दर्द भी मुस्कुराने लगा।
तुम्हारा हर एक शब्द मेरे लिए खास हो गया,
धीरे धीरे मेरा दिल तुम्हें चाहने लगा।
मेरे दिल का हर रिश्ता साँस लेने लगा,
जीवन का हर पल जैसे महकने लगा।
यह महफ़िल शब्दों की है, पर रौनक दिलों की है,
हर भावना में प्रेम और अपनापन बसा है।
शब्द ही दिलों को जोड़ते और रिश्ते बनाते हैं,
सूने जीवन में भी नई उमंग जगाते हैं।
कभी शब्द मरहम बनकर घाव भर जाते हैं,
कभी वही शब्द गहरे ज़ख्म दे जाते हैं।
नज़र मिले या न मिले, शब्द सब कह जाते हैं,
दिल की अनकही बातें भी सहज बता जाते हैं।
सच है, शब्द ही मोहब्बत का एहसास कराते हैं,
और कभी शब्द ही नफ़रत भी जगा जाते हैं।
इसलिए शब्द हमेशा सोच-समझकर बोलो,
क्योंकि यही दुनिया बदलने की ताकत रखते हैं।
तुम्हारी एक हँसी के लिए मैं जहाँ छोड़ सकता हूँ,
तुम मिले तो लगा मेरी हर दुआ रंग लाई है।
तुमसे बात होते ही मेरा दिल खिल उठता है,
हर पल जीवन में नई रोशनी छा जाती है।
तुम पास रहो या दूर, दिल मुस्कुराता रहता है,
तेरी एक झलक से धड़कन तेज़ हो जाती है।
तू है तो मेरी दुनिया सुरक्षित सी लगती है,
तेरे मिलन से मन को चैन और सुकून मिलता है।
तुम्हारी खुशी में ही मेरी खुशी बसती है,
तुम्हारे आँसुओं में मेरी आत्मा भी तड़पती है।
तुम साथ हो तो मेरा हर पल मुस्कुरा उठता है,
मेरी हर दुआ सिर्फ तुम्हारे लिए निकलती है।
मैंने तुम्हें दिल से चाहा, कोई सौदेबाज़ी नहीं की,
यही मेरे प्रेम की सबसे सच्ची कहानी रही।
तुम्हारे मीठे शब्द मेरे मन का संगीत बन गए,
दिल के कोने में छुपा हर दर्द मुस्कुराने लगा।
— नीलम प्रभा सिन्हा




