हरियाली तीज त्योहार

हरियाली तीज त्योहार
सावन की बूंदें,हरियाली आई,
धरती ने हरी-हरी चुनर ओढ़ी।
पीपल के पेड़ों पर झूला झूले,
हरेक आंगन में खुशियां दौड़ी।
चहुंओर हरियाली,छाये बहार,
वन मोर नाचे, कोयल कुहके।
खेतों में लहराए हरी फसलें,
बहु बेटियां खुशियों से चहके।
पैर में पायल छम-छम बोले,
हाथों में मेहंदी, पहनी चूड़ियां।
हरियाली तीज की गीत मधुर,
सुहागनों की निकली टोलियां।
ये त्योहार है प्रेम मिलन का,
प्यार और श्रद्धा का संगम।
पार्वती ने शिव को पाया था,
इसी दिन कठिन व्रत पावन।
पकवानों की खुशबू फैली,
घेवर, गुलगुले, खीर बनी।
मायके से पीहर आई बेटियां,
माँ की गोद में फिर से हंसी।
हरियाली सिर्फ पेड़ों में नहीं,
सखियों के दिलों में भरी हुई।
रिश्तों में मधुरता अप्रतिम प्रेम,
बैर नहीं, खुशियां हरी हुई है।
सावन धरती को किया हरा,
जीवन को भी करदे हरा भरा।
पेड़ लगाएं खूब खुशियां बांटे,
हरियाली तीज यादों से भरा।
चन्द्रकला शर्मा
प्रधान पाठक
बेमेतरा छत्तीसगढ़




