राष्ट्रीय दल को राष्ट्रीय पर्व से दूर रखना लोकतंत्र का अपमान : डॉ. अमित सिंह
स्वतंत्रता दिवस समारोह में "आप" की उपेक्षा क्यों?

“राष्ट्रीय दल को राष्ट्रीय पर्व से दूर रखना लोकतंत्र का अपमान : डॉ. अमित सिंह”
“स्वतंत्रता दिवस समारोह में “आप” की उपेक्षा क्यों?.
सतना, 17 अगस्त 2026।
देश के 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर 15 अगस्त 2026 को पुलिस परेड ग्राउंड, सतना में जिला प्रशासन द्वारा आयोजित जिला स्तरीय मुख्य समारोह में भारत निर्वाचन आयोग से राष्ट्रीय राजनीतिक दल के रूप में मान्यता प्राप्त आम आदमी पार्टी को आमंत्रित नहीं किए जाने पर आम आदमी पार्टी जिला सतना ने कड़ी आपत्ति एवं विरोध दर्ज कराया है।
आम आदमी पार्टी के जिलाध्यक्ष डॉ. अमित सिंह ने कहा कि स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस किसी एक राजनीतिक दल के कार्यक्रम नहीं, बल्कि पूरे देश और लोकतांत्रिक व्यवस्था के गौरव के राष्ट्रीय पर्व हैं। ऐसे अवसरों पर राष्ट्रीय मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के साथ समान एवं निष्पक्ष व्यवहार किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन द्वारा अन्य राजनीतिक प्रतिनिधियों को समारोह में आमंत्रित किया गया, लेकिन आम आदमी पार्टी जैसे राष्ट्रीय राजनीतिक दल को आमंत्रित नहीं किया जाना प्रशासनिक निष्पक्षता और लोकतांत्रिक परंपराओं पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
डॉ. अमित सिंह ने आरोप लगाया कि आम आदमी पार्टी की राष्ट्रीय पर्वों के जिला स्तरीय समारोहों में लगातार उपेक्षा की जा रही है। यदि प्रशासन की आमंत्रण प्रक्रिया में किसी निर्धारित नियम या व्यवस्था के आधार पर आम आदमी पार्टी को आमंत्रित नहीं किया गया है तो उसका स्पष्ट कारण सार्वजनिक किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय पर्वों के आयोजन में राजनीतिक विचारधारा के आधार पर भेदभाव की कोई गुंजाइश नहीं होनी चाहिए। लोकतंत्र में सत्ता पक्ष और विपक्ष, दोनों के लिए समान सम्मान एवं अवसर लोकतांत्रिक व्यवस्था की मूल भावना है।
आम आदमी पार्टी जिला सतना की ओर से इस संबंध में कलेक्टर से मांग की हैं कि 15 अगस्त के समारोह में पार्टी को आमंत्रित नहीं किए जाने का कारण स्पष्ट करने, विगत वर्षों की आमंत्रण व्यवस्था एवं अभिलेखों की जांच करने तथा भविष्य में सभी राष्ट्रीय राजनीतिक दलों को समान रूप से आमंत्रित किए जाने की मांग की गई है।
डॉ. अमित सिंह ने कहा कि आम आदमी पार्टी किसी विशेष राजनीतिक दल के पक्ष या विपक्ष में नहीं, बल्कि प्रशासनिक निष्पक्षता और लोकतांत्रिक अधिकारों के सम्मान की मांग कर रही है। राष्ट्रीय पर्व पूरे देश का उत्सव हैं और इनमें किसी भी मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल के साथ भेदभाव लोकतांत्रिक भावना के अनुरूप नहीं है।




