E-Paperसाहित्य रचना
शीर्षक -हर मानव तन्हा

शीर्षक -हर मानव तन्हा
दिनांक -25/08/26
तन्हाई के साए, सदा साथ चलते हैं।
हर इंसान अकेला, सभी तन्हा चलते हैं।।
यहांँ सभी तन्हा ,चाँद तारे तन्हा होते हैं
पुष्पों का गुलिस्तां साथ, पर तन्हाई के
साए होते हैं।
‘एकला’सफर के साथी, यहांँ पर सभी होते हैं।
सबके होते भी मानव, तन्हाई के साथ होते हैं।।
तन्हाई के साए में नित नया लिखते हैं।
किताब के पन्ने पढ़ती पर तन्हाई
के साए होते हैं।।
सुषमा सिंह*उर्मि*




