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शिवमाहात्म्य

शिवमाहात्म्य

 

शिवमास आया लेकर भक्ति, मन में श्रद्धा जागे।

हर-हर महादेव के जयकारे, गूँजें घर-आँगन आगे।

 

शिवलिंग पर जल चढ़ता है, बेलपत्र अर्पण होता।

दूध, धतूरा, पुष्प चढ़ाकर, मन का भाव समर्पित होता।

 

सावन के इस पावन मास में, पूजा-अर्चन होती।

सोमवार के व्रत से भक्तों के मन में आस्था होती।

 

काँवर लेकर शिवधाम पहुँचते, भक्त प्रेम में डूबे।

महादेव की कृपा पाने को, सारे कष्ट वे भूले।

 

हरियाली से धरती सजती, वर्षा जीवन लाती,

नदियाँ, ताल-तलैया भरतीं, प्रकृति नई मुस्काती।

 

नागपंचमी, हरियाली तीजें, सावन का श्रृंगार,

रक्षाबंधन जैसे पर्वों से, बढ़ता प्रेम अपार।

 

शिव की पूजा सिखलाती है, त्याग, दया और संयम,

सत्य, प्रेम, परोपकार से ही, सुंदर होता जीवन।

 

भोलेनाथ की कृपा मिले तो, सुख-समृद्धि घर आए।

तन-मन निर्मल, प्रेममय जीवन, हर आँगन मुस्काए।

 

शिवमास केवल पर्व नहीं है, आत्म-जागरण का संदेश,

शिव के चरणों में मन अर्पित कर, पाएँ जीवन का विशेष।

 

शिव नाम का दीप जलाएँ, मिटे मन का अँधियारा।

भोले की कृपा से महके, जीवन का हर उजियारा।

 

स्वरचित 

डाॅ सुमन मेहरोत्रा ‘सुरभि’

मुजफ्फरपुर, बिहार

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