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वीरता का तिरंगा

🇮🇳 वीरता का तिरंगा 🇮🇳

 

माटी ने जब वीर पुकारे, रण में कूद पड़े बलिदानी,भारत माँ के

 चरणों में, लिख दी अपनी अमर कहानी।

 

 

गूँज उठा था, नभ सारा 

ज़ब भारत ने हुंकार भरी थी 

भारत माँ के खातिर ज़ब वीरों ने हंसकर अपनी जान धरी थी…..

 

 

 

मंगल पांडे ने रण में आजादी का शंख बजाया था….

झांसी वाली रानी ने वीरता का पाठ पढ़ाया था..

 

 

चंद्रशेखर आजाद ने स्वर दिया था 

“आजाद रहूंगा, आजाद मरूंगा “

मातृभूमि की रक्षा के लिए 

ब्रिटिश सरकार से नहीं डरूंगा..

 

 

सुभाषचंद्र बोस की वाणी बिजली बनकर छायी थी 

“तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूंगा “, की गूँज ने जन -जन में आग लगाई थी..

 

 

गाँधी जी के सत्य एवं अहिंसा के सूत्र ने…

जन -जन को संगठित किया 

तब जाके असंख्य वीर जवानों ने भारत को स्वतंत्र किया..

 

 

उन वीरों के बलिदानों से 

आजादी का स्वर आया है..

लाल किले पर तिरंगा फहरा 

भारत ने उत्सव मनाया है….

 

 

तिरंगा केवल ध्वज नहीं,, यह मेरे देश के वीरों की पहचान है 

इसके खातिर मर -मिट जाना ही सच्चे वीर का सम्मान है…. 🇮🇳

 

 

 

नाम – ललिता डोभाल ‘प्रज्ञा ‘

पता – बड़कोट उत्तरकाशी,, उत्तराखंड ✍️✍️

 

जय हिंद जय भारत 🇮🇳🇮🇳🙏

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