जेल की सलाखों से आज़ादी तक

जेल की सलाखों से आज़ादी तक
देश के वीरों को हम नमन कर अपनी बात शुरू करते हैं।
भगत सिंह को कौन नहीं जानता? उनके दिल में
ज़िंदगी से ज्यादा हर पल देश के लिए जीने की चाहत थी।
उनके सीने में देश बसा हुआ था। भगत सिंह को जेल में बंद किया गया,
लेकिन उन्होंने अंग्रेज़ सरकार की परवाह नहीं की और हँसते हुए फाँसी के फंदे पर झूल गए।
राजगुरु ने अपना जीवन और जोश देश के लिए कुर्बान कर दिया।
वे अपने साथियों के साथ हँसते हुए फाँसी पर चढ़ गए।
देश की आज़ादी के लिए उन्होंने अपना लहू बहाया
और देश में क्रांति की लहर पैदा की।
भगत सिंह ने अपना जीवन देश के लिए समर्पित कर दिया।
सुखदेव ने भी संकल्प लिया कि चाहे कुछ भी हो जाए,
देश को स्वतंत्र करना है। उन्होंने अपनी पूरी शक्ति लगाई
और देश के लिए अपने प्राणों की बाज़ी लगा दी।
राम प्रसाद बिस्मिल की कलम से क्रांति की आवाज़ उठती थी।
उनकी कविताओं और विचारों से लोगों में देशभक्ति की भावना जागी।
भारत में चारों ओर आज़ादी की लहर उठने लगी।
चंद्रशेखर आज़ाद बचपन से ही स्वतंत्र रहना चाहते थे।
उन्होंने अपना नाम आज़ाद रखा और देश की आज़ादी के लिए
अपना जीवन समर्पित कर दिया।
वे भारत की आन और शान के लिए कभी पीछे नहीं हटे।
आज़ादी के लिए उनका संकल्प हमेशा मजबूत रहा।
जेल की सलाखों में बंद रहकर भी वीरों ने बहुत कष्ट सहे।
सभी स्वतंत्रता सेनानी भूख और प्यास सहकर
देश के लिए अपना जीवन देने को तैयार थे।
जब कुछ खाने को मिला तो खा लिया,
नहीं मिला तो भी धैर्य रखकर रहे।
उनका त्याग एक दिन काम आया।
अंग्रेज़ों के शासन से भारत को स्वतंत्रता मिली।
महात्मा गांधी ने सत्य और अहिंसा के रास्ते पर चलकर
देश को आज़ादी की राह दिखाई।
उन्होंने हर पीढ़ी को देशभक्ति और राष्ट्रप्रेम का संदेश दिया।
सुभाष चंद्र बोस ने भी देश की आज़ादी के लिए
अपनी सेना के साथ बहुत प्रयास किया।
उन्होंने विदेश में रहकर भी देश के लिए काम किया।
उनका नारा था,
“तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आज़ादी दूँगा।”
हर भारतवासी देश के लिए मर मिटने को तैयार था।
लोग देश के लिए बलिदान देने के लिए आगे आए।
जेल की सलाखों में बंद वीरों के बावजूद
हिंदुस्तान की मिट्टी में आज़ादी की आवाज़ गूँजती रही।
आज़ादी के दीवानों की आवाज़ हर जगह सुनाई देती रही।
गांधी जी के नेतृत्व में आज़ादी की लहर पूरे देश में फैल गई।
इन वीरों के त्याग, बलिदान और संघर्ष से
भारत को स्वतंत्रता मिली।
आज हम स्वतंत्र भारत में साँस ले रहे हैं।
इसलिए उन सभी स्वतंत्रता सेनानियों को
हम हृदय से नमन करते हैं।
— नीलम प्रभा सिन्हा




