सुंदर संसार

सुंदर संसार ——- जब हो अमन शांति जग में
परस्पर हो प्रेम सब में।
माता पिता का सम्मान हो।
मानवता का उत्थान हो
बच्चों के चेहरे पर खिलखिलाहट हो।
नारी के चेहरे पर मुस्कुराहट हो।
आपसी संबंधों में ना बनावट हो।
चहुं और फूल मुस्कुराते हो
फल अपनी मिठास बरसाते हो।
नदियां शुद्ध और स्वच्छ हों
प्रकृति के खुले हुए खजाने भी मदमस्त हों।
भंवरे भी गीत गुनगुनाते हो।
कमल भी खिलकर अपनी अलग छटा दिखाते हो।
ऊंचे ऊंचे वृक्ष भी यूं ही हाथ हिलाते हों।
सब्र प्रत्येक मानव में हों
सुदामा और कृष्ण जैसे भी मित्र हों।
सीमा ना तोड़े सागर कभी।
परमात्मा को ना भूलें सभी।
आएगा क्या कभी समय ऐसा?
जब पैसों से ज्यादा संबंधों की अहमियत हो।
संतुष्टि प्रत्येक मन में हो
सत्य का ही सब दें सभी,
छल किसी के मन में ना हो।
आसमान से भी खुशियों की वर्षा बरसे।
किसी का भी मन किसी भी चीज को ना तरसे।
तुलना कभी कोई किसी से न करे।
इंसानियत कभी किसी की भी ना मरे।
क्या होगी कोई ऐसी जगह जग में?
जैसे कि आज देखी है मैंने स्वप्न में।
मधु वशिष्ठ फरीदाबाद हरियाणा




