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शिव सावन मन भावन

शिव सावन मन भावन

 

धूप से झुलसी धरती पर,  

जब बूंदों की फुहार पड़ती है।  

सूखे पेड़ भी हरे हो जाते,  

शंख ध्वनि सुनाई पड़ती है।  

 

खेतों में हरियाली होती,

आंगन में महक बिखरती है,  

मेंढक की बोली, पपीहे की पीहू,

कोयल भी गाने लगती है।

 

भक्तिमय भोले का महीना 

सावन में शिव का द्वार खुला, 

सोमवार व्रत, कावड़ की भीड़,  

मन भाव भक्ति रस में भूला।  

 

ओंकार की गूंज सदा ही,

मंदिरों से सदा ही आता है ,

जो मांगो दिल से मिल जाता ,  

सावन सभी के मन भाता है ।  

 

भीगते हुए स्कूल को जाना,

 कागज की वो नाव चलाना।  

झूले झूलना,सखियों के साथ, 

शिव जी को श्रद्धा से मनाना।

 

बादल बरसे, धरती नहाए,  

मन का मैल भी धुल जाए।  

प्रेम बढ़ाये,हर रिश्ते सवारे,  

तभी तो सावन मन को भाए।

 

डमरू की ध्वनि गूंज रही,

ॐकार की जय जयकार,

शिवलिंग पर पुष्प चढ़े तो,

 महके भक्ति लहर हर द्वार।

 

दीप जलें मन के मंदिर में,

मिट जाते सारी अंधकार,

ओम् नमः शिवाय जपते ही,

मिले हृदय को शांति अपार।

 

सावन में प्रकृति,भक्ति,भाव,

शिव की महिमा अपरम्पार।

सावन मास बड़ा सुहावना,

शिव शिव के हुए मंत्रोच्चार।

 

साधना आया मन को भाया,

भक्त जनों की भीड़ बढ़ी।

कांवर ले चले भोले के द्वार,

जयकारा की गूंज गली-गली।

 

सावन की पावन मास में,

मन में शिव का ध्यान रखें,

भोले की करुण कृपा बरसे,

हर श्वास में शिव नाम रमे।

 

बेलपत्र , धतूरा,मांग चढ़े,

गंगा जल की है धार बहे।

भोलेनाथ कृपा दृष्टि कर,

भक्त जनों के उद्धार करें।

 

  चन्द्रकला शर्मा 

   प्रधान पाठक 

बेमेतरा छत्तीसगढ़

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