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भक्ति गीत : हे मंगलमूर्ति गणेश भगवान 

भक्ति गीत : हे मंगलमूर्ति गणेश भगवान 

 

“जय जय मेरे गणपति गजानन महाराज,

अपने सारे भक्तों की बचाते रहना लाज।“

 

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एक विनती सुनो, हे जग के मंगलमूर्ति गणेश भगवान,

हमको ऐसा देना वरदान कि तेरे चरणों में मिले स्थान।

जन्म जन्म तक तेरी भक्ति में लीन रह तेरी सेवा करें,

तुमने सब कुछ दिया है, और क्या मांगें हे कृपा निधान?

एक विनती सुनो…………

 

तुम सब कुछ देखते हो देव और जानते हो हर सच्चाई,

बड़ी तेजी से दुनिया से आज गायब हो रही है अच्छाई।

लोग अब भूलते जा रहे हैं भलाई और कर रहे हैं बुराई,

घोर कलियुग बीत रहा प्रभु, लोग होते जा रहे बेईमान।

एक विनती सुनो…………..

 

अध्यात्म छोड़कर लोग, हिंसा के मार्ग अपना रहे आज,

अपनी चमक और महक, खोता जा रहा मानव समाज।

तुमने जो ज्ञान दिया है उसी से विकसित हुआ विज्ञान,

उसी विज्ञान से लाभ कम, अधिक हो रहा है नुकसान।

एक विनती सुनो…………

 

रूस और अमेरिका में हमेशा ही बिगड़ी रहती है बात,

दोनों देते हैं एक दूसरे के खिलाफ शत्रुओं का ही साथ।

कहां से कहां पहुंच गए हैं, अब इजरायल और ईरान?

इनकी सोच बदलकर, निकालो समस्या का समाधान।

एक विनती सुनो………….

 

प्रमाणित किया जाता है कि यह रचना स्वरचित, मौलिक एवं अप्रकाशित है। इसका सर्वाधिकार कवि/कलमकार के पास सुरक्षित है।

 

सूबेदार कृष्णदेव प्रसाद सिंह,

जयनगर (मधुबनी) बिहार/

नासिक (महाराष्ट्र)

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