
विषय —शब्द -सीढ़ी
प्रदत्त शब्द —सोना,वर्षा, मिट्टी,बीज अंकुर ।
“सोने” जैसी चमक खेत में,स्वर्ण रश्मियां लाएं।
रंग परिश्रम भरे कृषक मन , फसल उठी लहराएं।
“वर्षा” की रिमझिम बूॅंदों से,भू हरियाली पाए।
सूखे खेतों के अधरों पर , मुस्कान नयी छाए।
“मिट्टी” की है सौंधी खुशबू, मन को बहुत सुहाए,
जुड़ा रहे माटी से जीवन, हर पल सुख बरसाए।
“बीज “छिपाए मन में अपने, सुंदर-सुंदर सपने,
धरती की गोदी में जाकर, बनते जीवन अपने।
“अंकुर” बनकर बाहर आये, धरती पर मुस्काए,
नन्ही-सी हरियाली बनकर, जीवन गीत सुनाए।
स्वरचित
डाॅ सुमन मेहरोत्रा ‘सुरभि’
मुजफ्फरपुर, बिहार




