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      बधाई जी पावनतम रथयात्रा

 

        बधाई जी पावनतम रथयात्रा

माता रोहिणी पटरानियों को, 

        सुनाईं राधे-राधे रटने की व्यथा। 

द्वार बैठे रहें मंत्र मुग्ध होकर, 

       कृष्ण,बलभद्र,सुभद्रा बनें कथा।। 

 

नारद को भा गया यह चित्र, 

       मृत्यु लोक हेतु ए तारक विचित्र। 

तीनों पुरी में जगन्नाथ मंदिर, 

      स्थापित हुए जैसे खुशबूदार इत्र।। 

 

आषाढ मासे कृष्ण पक्षे द्वितीया, 

        भगवान् जगन्नाथ रथयात्रा‌ निकले। 

रथ खींचने जन सैलाब असंख्य,

        रस्साकशी करते प्रेममय विकले।। 

 

प्रथम बलदाऊ तालध्वज’ रथ, 

       लाल व हरे रंग ध्वज उन्नावी नाम। 

संरक्षक-वासुदेव,सारथी-मातलि, 

       त्रिब्रा,घोरा,दीर्घशर्मा,शपथानव।। 

 

द्वितीय सुभद्रा दर्पदलन रथ, 

       काले-नीले ध्वज नादंबिका नाम। 

संरक्षक जयदुर्गा,सारथी अर्जुन, 

     रो-मोचिका,जीता,अपराजिता नाम।। 

 

संरक्षक-गरुड़,सारथी-दारुका पीछे, 

      लाल-पीले नंदीघोष,त्रैलोक्यमोहिनी। 

 शंख,बलाहक,सुवेता,दहिदाश्व घोड़े, 

       देवता- मदनमोहन,शंखचूड़ नागिनी। 

 

 देवता मदनमोहन,रामकृष्ण,सुदर्शन, 

        निकले हैं रथों में सवार नगर भ्रमण।। 

जगन्नाथ,बलभद्र,सुभद्रा गुंडिचा चले, 

        त्रिमूर्ति मौसी घर करेंगे सुकूने शयन।। 

 

रस्सा खींचने मस्कत करें भक्त जन, 

        लेकर चले घर से जीवन मुक्ति के मन। 

जनसैलाब समर्पित महाप्रभु पर हैं, 

        पुलकित निहारें कन्हैया सबके लगन।। 

 

दसमी तिथि वापसी है बहुडा यात्रा, 

        स्कंद,नारद,पद्म,ब्रह्म पुराणों में यात्रा।। 

पुनीत रस्सा खींचे मोक्ष जीव यात्रा, 

        सुरेश दे बधाई जी पावनतम रथयात्रा।। 

स्वरचित मौलिक रचना संग

सुरेश कुमार बन्छोर “अभ्यर्थी”

सेवानिवृत्त प्रबंधक

भिलाई इस्पात संयंत्र

समाजसेवी,साहित्यिकार

हथखोज देमार पाटन

 तालपुरी भिलाई छ ग

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