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शीर्षक -मेरे गुलिस्तां के पुष्पों

शीर्षक -मेरे गुलिस्तां के पुष्पों

           दिनांक -17/08/26

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मेरे गुलिस्तां के पुष्पों,

एक नयी बहार बनों तुम।

खुश्बू देश में फैला कर,

विजय का हार बनों तुम!

 

दुश्मनों से कह दो तुम,

डरते नहीं हम तुमसे।

मातृभूमि के हम रक्षक हैं,

सेवा करते तन-मन से।

 

चुकाएंँगे हम कर्ज देश का,

वफादार सैनिक बनकर है।

मातृभूमि की रक्षा खातिर,

हम सभी सैनिक तैयार हैं ?

 

कभी नहीं झुकाना सिर,

दुश्मनों के सामने तुम।

वतन की शान हो कम,

करना नहीं वो काम तुम।

 

हर भारतीय तुम पर गर्व करे,

ऐसा चमकता सूरज बनों तुम।

अपने नेक काम से तुम सैनिक,

जग में एक मिसाल बनों तुम!

 

खुशियांँ अपनी बांँटना,

वतन में सभी को बराबर।

धर्म चाहे कोई भी हो,

सम्मान हो सभी का बराबर?

 

इंसाफ सभी का करना तुम –

एक नेक इंसान बनना तुम!!

 

मेरे गुलिस्तां के पुष्पों –

एक नई बहार बनों तुम!

 

       सुषमा सिंह उर्मि

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