जीवन में गुरु का महत्व है गुरु

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जीवन में गुरु का महत्व है गुरु
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वेदों और महाभारत की रचना
महर्षि वेद व्यास के है बदौलत।
व्यास पूर्णिमा जन्मदिन कारण,
गुरुपूर्णिमा होता है शुभ मुहूरत।।आदियोगी शिव सप्तऋषियों में,
सर्वप्रथम ज्ञान देना किए शुरू।
आदियोगी और शिव परंपरा में,
शिवजी हैं पहले दुनिया के गुरु।।भगवान बुद्ध सारनाथ में दिए हैं,
इस तिथि को ही पहले उपदेश।
अनुयायी मंत्र-मुग्ध हो गए जहाॅं,
बौद्ध के वाणी से बदला परिवेश।।आषाढ़ मास की पूर्णिमा तिथि,
स्नान कर पूजा फिर दान करते।
भगवान विष्णु, माॅं लक्ष्मी और,
अपने गुरुओं को ध्यान है धरते।।स्नान दान पूर्णिमा भी कहते हैं,
पवित्र नदियों में करते हैं स्नान।
जानने जीवन में गुरु का महत्व,
लेते हैं उनके चिंतन का संज्ञान।।जीवन में गुरु का महत्व जरुरी,
श्रीकृष्ण के ऋषि सांदीपनि गुरु।
महर्षि वशिष्ठ,महर्षि विश्वामित्र,
मर्यादा पुरुषोत्तम राम के थे गुरु।।जीवन में गुरु का महत्व समझें,
सीखें अनुशासित जीवन कला।
जन्म-मृत्यु बीच हीरा है जीवन,
अगर धारणा को न समझें बला।।माता-पिता प्रथम गुरु हैं हमारे,
फिर प्रत्येक संपर्क के लोग गुरु।
जहाॅं से भी मिले ज्ञान स्वीकारें,
जीवन में गुरु का महत्व है गुरु।।
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स्वरचित मौलिक रचना संग
सुरेश कुमार बन्छोर “अभ्यर्थी”
हथखोज/ देमार (पाटन)
तालपुरी भिलाई छत्तीसगढ़
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