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शब्दों का आसमान

शब्दों का आसमान:—-

 

शब्दों का अपना आसमान,शब्दों की अपनी उड़ान,

जिसने शब्दों को जीना सीखा,

उसका होता सम्मान।

 

शब्दों में सावन की रिमझिम,शब्द कभी बनते अरमान।

शब्दों में मधुमास,शब्दों में माँ की ममता है,

शब्दों में विश्वास,शब्दों से इतिहास रचा है,

शब्दों से ही जग को दें हम,एक नया इंसान।

 

शब्दों ने दी पहचान,शब्दों ने पत्थर में ढूँढ़ी,

जीवन की मुस्कान शब्द कभी बनें तलवार ,

शब्द कभी मरहम बन कर मन को दें निर्मल।

शब्द अगर सच्चे हों मन के,बनते हैं वरदान,

 

शब्दों से रिश्ते जुड़ते हैं,शब्दों से मन मिलते,

मीठे शब्दों के स्पर्शों से,सूखे नयन भी खिलते।

शब्दों से सपने सजते हैं,शब्दों से विश्वास,

शब्दों में ही बसता जग का,सारा प्रेम-विधान।

 

सुभाषिनी जोशी ‘सुलभ’

इन्दौर मध्यप्रदेश

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