मोबाइल

मोबाइल ================ आधुनिक समय में सब कुछ ले गया मोबाइल।
दिनभर कितने भी कर ले काम ।
बिन तेरे रह भी नहीं पाते ।
अपनों से दूर रह कर भीतरी संग सब रिश्ते निभाते।
तुम बन रहे हो सबके चहेते ।
राजा रंक नेता बच्चे
प्यार से संग तुमको रखते।
हर विरह के मिलन बने तुम ।
नव जोड़ी के सुखद बने तुम।
बुढ़ापे का सहारा….
आधुनिकता के पहल बने तुम ।
सब कुछ अपने पास सहेज रख लेते।
फोटो,वीडियो और पैसे..
फिर भी लोगों के मुख से सुना है ।
ये मोबाइल सब खा जाता।
कोई अब पहले जैसे नहीं आता।
न ही प्यार स्नेह बरसाता
समय संग रिश्ते खा जाता ।
सबकी अपनी अपनी पड़ी है।
जो जैसे तुमको अपनाता
उसी रूप में तुमको पाता ।
आधुनिकता के पहचान हो तुम ।
ज्ञानों के भंडार हो तुम ।
नित नए गुणों के उदगार हो तुम ।
हर किसी की छोटी सी संसार हो तुम।
गुम हो जाते हो तो
मातम सा छा जाता है ।
मिल जाते हो बिन बोले
तो चेहरे पर असीम खुशी ले आता है।
मोबाइल को बना कर संगी साथी,
जीवन को दे ..दो नई पहचान।।
✍🏻 श्यामा प्रभाकर दास🙏🏻 🙏🏻 मुंबई
शुक्रवार ०७/०८ /२६




