राधे – राधे

राधे – राधे
राधे राधे मेरी राधे,
राधे राधे मेरी राधे।
मैं तो अति ही पतित हूँ, राधे,
तू तो पतित-पावनी है, राधे।
मुझे भी पावन बना दे, राधे,
मेरा हाथ पकड़ ले, राधे।
ले चल मुझे अपने साथ,
तेरी शरण ही मेरा पथ है, राधे।
कान्हा तो बड़े न्यायी हैं, राधे,
मैं उनसे पार न पाऊँ, राधे।
तुम तो करुणा की अवतार हो,
करुणा कर, करुणामयी राधे।
मैं रो-रो कर तुम्हें पुकारूँ,
सुन लो मेरी पुकार, राधे।
आ जाओ कोई बहाना करके,
मेरा हाथ थाम लो, राधे।
मैं सेवा करूँगी तेरी, राधे,
तेरे चरण धीरे-धीरे दबाऊँगी।
तेरे बाल सँवारूँगी, चोटी गूँथूँगी,
वेणी सजा प्रेम से बाँधूँगी।
तुझे स्नान कराऊँगी, राधे,
सुंदर वस्त्र पहनाऊँगी।
तुझे देखकर कन्हैया भी,
प्रेम से तुझे गले लगाएँगे।
फूल चुनूँगी, माला गूँथूँगी,
तुझे प्रेम से पहनाऊँगी।
एक माला और दूँगी तुझे,
तू कन्हैया को पहनाना, राधे।
तेरे लिए सुंदर भोग बनाऊँगी,
जो तेरे मन को भाए, राधे।
कद्दू की सब्ज़ी और मालपुआ,
अपने हाथों से खिलाऊँगी, राधे।
बचा हुआ प्रसाद मैं भी पाऊँ,
मेरी बिगड़ी बन जाएगी, राधे।
तुझे एक दासी मिल जाएगी,
मुझे एक प्यारी-सी माँ मिल जाएगी।
अपने शरणागत को हृदय से लगाती,
पलकों में छिपाकर रखती हो।
तेरे प्रेम में मैं पागल हो जाऊँ,
हर क्षण “राधे-राधे” रटती रहूँ।
कोई पागल कहे तो कहने दे,
मैं तेरे प्रेम में डूबी रहूँ।
बार-बार तेरा नाम जपूँ,
तेरा चेहरा आँखों में बसाए रहूँ।
— नीलम प्रभा सिन्हा




