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देश का लोकतंत्र

देश का लोकतंत्र 

 

देश के लोकतंत्र को

सत्य रूप में पहचानती हूँ मैं।

जीवन के हर उत्तरदायित्व को

निष्ठा से निभाती हूँ मैं।

 

चुनाव का पावन पर्व आया,

मन-बुद्धि से सजग रहती हूँ मैं।

कौन बने जनसेवक सच्चा,

यही विवेक से परखती हूँ मैं।

 

प्रार्थना करती हूँ परमात्मा से—

सही निर्णय की शक्ति देना।

राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखकर

मत का सम्मान करना सिखाना।

 

भारत माँ की जागरूक नागरिक बन,

हर कर्तव्य निभाती हूँ मैं।

मतदान करते हर पल केवल

देशहित ही सोचती हूँ मैं।

 

हे प्रभु! सबको सद्बुद्धि देना,

वचन निभाने का बल देना।

लोकतंत्र की इस पावन मर्यादा को

सदैव अक्षुण्ण बनाए रखना।

 

— अमिता मराठे

लेखिका व समाज सेविका 

इंदौर मध्य-प्रदेश

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