तुम्हें क्या चढ़ाऊं शिव शम्भू !

तुम्हें क्या चढ़ाऊं शिव शम्भू !
जिसकी जटा में हो स्वयं अविरल मां गंगा !
तुम्हें क्या दूं शिव शम्भू !
तुम तो स्वयं ही त्रिदेव हो!
तुम्हें नैवेध क्या लगाऊँ शिव शम्भू !
तुम्हारे संग में माता अन्नपूर्णा !
समझ न आए मुझे …..
तो खाली हाथ ही तेरे द्वार पर आएं है शिव शम्भू !
अपने दोनों कर उठाकर स्वयं को समर्पण करने आएं हैं !
जय महाकाल 🙏🏻🙏🏻
हे शिव शम्भू तेरे शरण में आएं हैं !
तुम्हें हम अपना अंहकार, क्रोध, द्वेष अर्पण करने आएं हैं !
हम भिक्षुक तुम स्वामी शिव शम्भू !
हम तेरे शरण में आएं हैं !
स्वीकार करो हे महाकाल !
कर खाली ही आएं हैं !
सबकुछ तेरा ही है प्रभु !
तेरा ही तुमको अर्पण करने आएं हैं !
जन्म सुफल कर देना शिव शम्भू !
कामक्रोध , कष्ट , काल, द्रारिद्र, रोग दुःख हर लेना प्रभु!
जय महाकाल मन से कहने आएं हैं !
तुम्हें मैं क्या दूं शिव शम्भू !
अपना ….मैं …ही चढ़ाने आएं हैं !
🙏🏻जय शिव शम्भू🙏🏻
🙏🏻 जय महाकाल🙏🏻
✍🏻 “श्यामा” के शब्दों की यही करुणा भरी पुकार !!



