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पड़ोसन

पड़ोसन
मेरी एक पड़ोसन,
हँसती रहती हर क्षण।
नज़रें रखती हर पल,
छन छन देखती रहती।
पता नहीं क्या देखती,
आती रहती हर दम।
कभी खुशी, कभी गम,
ढाँढस बढ़ाकर जाती।
ऐसे पति पर ही वो नज़रें रखती,
कब आते, कब जाते घर से,
सब खबर रखती।
जब घर में रहते,
तभी वो आती,
हँस हँसकर वो बातें करती,
पति की हँसी हो, तो वो भी हँसती।
मुझे चाय बनाइए कहकर
खुद ही मुझे हटा देती।
अब आप ही समझाइए,
क्या होती मेरी स्थिति!
ऐसी पड़ोसन से भगवान बचाए।
जब मैं कुछ बोलती,
वो बोलते हँसी मज़ाक करती।
इससे अपना क्या पता,
मन बहलाता रहता!
नीलम प्रभा सिन्हा




