
गद्दार
गद्दार हो तुम गद्दार हो तुम
भारत विशाल के
भारत महान के
खाते हो यहाँ
रहते हो यहाँ
पर मन वसता
उस जहाँ
धर्म है अपनी जहाँ
यह देश है
धर्म निरपेक्ष
वसती है यहाँ
सारे धर्मों की थाती
जाति अलग अलग
पर देश है एक
भारत महान
जहाँ हर व्यक्ति
व्यक्ति हैं स्वतन्त्र
निभाने का
धर्म यहाँ अपना
पर क्यों तुम करते हो
गद्दारी गद्दारी
गद्दार हो तुम गद्दार हो तुम
भारत महान के
भारत विशाल के
आस्था जब है
भारत से
रहते हो जब भारत में
सुख दुःख का साथ है तेरा
पर क्यों करते हो गद्दारी मकारी
यह किसने सीख दी
फूट कराओ
फूट कराओ
भाई भाई में
फूट कराओ
यह कैसी संस्कृति
सीखा है तुमने
यह भारत की नहीं
यह देन है पश्चिम की
अपनी संस्कृति सीखो
और सुधारो चाल अपनी
नहीं तो ठीक न पाओगे
इस देश की धरती पर
गद्दार हो तुम गद्दार हो तुम
समय रहते चेत जाओ
ओ देश के गद्दारो
यह देश है वीर जवानों की
विध्वंस करके रख देगी
तेरी हर चाल
फिर ना कहना
भारत की गलती
गद्दार हो तुम गद्दार हो तुम
भारत विशाल के
भारत महान के
नीलम प्रभा सिन्हा




