
👆चित्र आधारित रचना
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शुद्ध पर्यावरण संरक्षित दृश्य
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वृद्धावस्था में भी देखो न,
दाम्पत्य कितना खुशहाल।
सूर्योदय विचरण करते हुए,
दोनों खुशी से हैं मालामाल।।
प्रातः काल रवि लालिमा,
दोनों हाथों में हाथ डाले हैं।
सुबह वे हाट-बाजार करने,
चले लाठी पर्स सम्हाले हैं।।
खेती निपटा हरी साड़ी संग,
सावन में बदली की ये धूम।
श्रंगार किए कदम मिलाके ये,
चलते हुए लगे दृश्य अनूप।।
इस उम्र भी यह प्रेम कहानी,
देखने में लगता है चितचोर।
जीवन को जीने की कला है,
कितना सुन्दरतम् यह भोर।।
पगडंडी नहीं अपितु यह है,
यथार्थ में जीने की सच्चाई।
तनावमुक्त,शांतिपूर्ण संग है,
सुरक्षित संबंध की परछाई।।
प्राकृतिक रौनकता लिए है,
निखरती रोचक ये परिदृश्य।
देखते ही लुभा रही लिखने,
शुद्ध पर्यावरण संरक्षित दृश्य।।
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स्वरचित मौलिक रचना संग
सुरेश कुमार बन्छोर “अभ्यर्थी”
हथखोज देमार पाटन
तालपुरी भिलाई छत्तीसगढ़
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