E-Paperसाहित्य रचना

विषय : हनुमान वंदना

सार छंद(16,12-पदांत22)

विषय : हनुमान वंदना

 

संकटमोचन नाम तुम्हारा, हरते सबकी पीरा।

रामदूत अंजनि के नंदन, जगत में महावीरा॥

 

भक्ति-शक्ति के तुम हो सागर, पावन छवि गंभीरा।

राम-नाम हृदय में बसाकर, बने जग के अधीरा॥

 

सीता माँ का शुभ संदेशा, राम तक पहुँच धीरा।

लंक दहन कर धर्म बचाया, कीर्ति हुई गम्भीरा॥

 

दुष्ट दलन कर संत उबारे, मिटती भव की पीरा।

दीन जन पर कृपा बरसाते, बनकर भाग्य लकीरा।।

 

ज्ञान-गुणों के तुम हो सागर, बुद्धि करो समधीरा।

बल-विवेक प्रदान कर दाता, हर लो मन की पीरा॥

 

‘सुरभि’ नित श्रीराम के सेवक, नमन चरण रघुवीरा।

हनुमत कृपा सदा बरसाओ, हो जीवन सुखधीरा॥

 

स्वरचित

डाॅ सुमन मेहरोत्रा ‘सुरभि’

मुजफ्फरपुर, बिहार

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!