लहू से लिखी आज़ादी की दास्तां “

” लहू से लिखी आज़ादी की दास्तां “
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वीरों की लहू से लिखी आज़ादी की दास्तां ।
कोटि – कोटि नमन शहीदों को
करता है हिन्दुस्तान ।
अपने लहू से लिख गए आजादी की दास्तां ।
वीरों की बलिदान ही बनी आजादी की पहचान ।
कर्ज तुम्हारा चुका न सकेगा
हिन्दुस्तान महान ।
तुम्हारे बलिदान त्याग से लहराया तिरंगा आसमान ।
शब्द पड़े हैं कम मेरे !
अश्रु से भरे नयन मेरे !
श्रद्धा से मस्तक झुका है,
तुम्हारे ही बलिदान से सुरक्षित हुआ है हमारा हिन्दुस्तान ।
हे भारत वीर महान!
लहू से लिखा आज़ादी की दास्तां ।
हर दास्तां पर शहीदों की कहती वीरगाथा ।
पावन विजयी की शौर्यगाथा ।
शत शत नमन करते हैं तुमको ।
सरहद पर जो लहू बहा
उसी से रंगा हमारा तिरंगा ।
शौर्य को दिखलाती केसरिया,
सादा रंग शांति और सच्चाई को,
हरी बनी है हरियाली समृद्धि प्रकृति हमारी,
लेती है अंगराई,
अशोकचक्र से अनवरत चलना सिखलाया,
कार्य निरंतर करना बतलाया,
लहू से लिखी आज़ादी की दास्तां ।
भारत को महान बनाया ।
भगत सिंह, चन्द्रशेखर आजाद, रानी लक्ष्मीबाई सबने एक ही सपना देखा: स्वतंत्र भारत हो अपना ।
आजादी का पर्व मनाओ, मत भूलो वीरों की कुर्बानी ।
आज़ादी की दास्तां को अपने ही लहू से लिखा है आज़ादी के वीरों ने,
आजादी की कहानी ही अपनी आजादी की सुनाती है दास्तां ।
आजादी के अमर जवान तुम्हारे ही त्याग बलिदान से बना हिन्दुस्तान महान ।
जय जय जय हे अमर जवान !
जय भारत माता के लाल ! तुम्हारे ही पवित्र लहू से भारत माता का धरा लाल ।
तुम्हारे ही पावन लहू से चमके भारत माँ का भाल ।
🙏🏻🇮🇳🙏🏻
✍🏻 श्यामा प्रभाकर दास
मुम्बई




