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विषय। : “लहू से लिखी आज़ादी की दास्ताँ”

 

विषय। : “लहू से लिखी आज़ादी की दास्ताँ”

दिन : शुक्रवार 

दिनांक : 14/ 8 /2026 

विधा : कविता

रचनाकार -श्रीमती शशिकला पाण्डेय, भिलाई छत्तीसगढ़ 

सदस्यता प्रीमियम क्रमांक : 441 

 

लहू से लिखी आज़ादी की अमर कहानी है,

वीरों के बलिदानों की यह अनुपम निशानी है।

माँ भारती की रक्षा हित हँसकर शीश चढ़ाए जो,

उन रणधीरों की गाथा युग-युग तक सुननी है॥

 

फाँसी पर झूले हँसते-हँसते वीर जवान अनेक,

सहते रहे यातनाएँ, पर छोड़ा नहीं विवेक।

भगत, सुखदेव, राजगुरु के त्याग अमर गाते हैं,

पूरे भारतवासी होकर एक॥

 

रानी लक्ष्मीबाई ने रण में सिंहनाद किया,

तलवारों की ज्वाला से शत्रु का विनाश किया।

तात्या, मंगल, नेताजी के साहस का क्या कहना,

भारत माता के चरणों में जीवन अर्पित किया॥

 

जलियाँवाला बाग आज भी पीड़ा सुनाता है,

निर्दोषों के रक्त से इतिहास नहलाता है।

हर बूँद कह रही हमसे, मत भूलो बलिदानों को,

वीर शहीदों की गाथा ही, देश धरा को सजाता है।।

 

तिरंगा जब नभ में लहराकर मुस्काता है,

वीरों के बलिदानों का संदेश सुनाता है।

इसकी आन, बान, शान हेतु जीवन अर्पित होगा,

भारत माँ का गौरव जग में सदैव लहराता है॥

 

आओ मिलकर प्रण करें, राष्ट्र प्रथम होगा सदा,

सत्य, शौर्य, सेवा-पथ पर बढ़ता रहेगा देश सदा।

लहू से लिखी आज़ादी की यह गौरव गाथा है,

हिमालय की ऊंची चोटी पर, तिरंगा लहराता रहेगा सदा।।

 

जय हिन्द! वन्दे मातरम्!

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