साहित्य रचना
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नव गीत
नव गीत साँझ ढली, गाथा गाए, दीपक की लौ अनुरागी। थका दिवस घर लौट रहा, राह देखे आशा…
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रे मूढ मति,बुद्धि के गागर भर
रे मूढ मति,बुद्धि के गागर भर शीर्षक:–जीवन का ज्ञान पंचतत्व से बना हुआ यह पावन शरीर। खींचातानी भागदौड़ में…
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आया सावन पावन मास
आया सावन पावन मास काली घटा घिर-घिर आई, सावन आया द्वार में, धरती मां की गोद में उतरे, हरी-भरी…
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(no title)
गद्दार गद्दार हो तुम गद्दार हो तुम भारत विशाल के भारत महान के खाते हो यहाँ रहते हो यहाँ…
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जिन्दा रावण
जिन्दा रावण चलो सोहनी मेला देखने चलते हैं। देखो… मोहल्ले के सभी वहाँ जा रहे हैं। रमा ने कहा,…
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रिमझिम-रिमझिम गीत सावन के
रिमझिम-रिमझिम गीत सावन के सावन की रिमझिम में तुझको ही मैं ढूँढ़ूँ। आ जा प्रियतम, जहाँ भी हो, मेरे…
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मोह
३०/०७/२६ गुरुवार मोह ——————- पुत्र मोह की बेड़ियों में फिर बंधी गांधारी, और जन्मा दुर्योधन अभिमानी। …
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मुखड़ा
गीत सृजन मुखड़ा : चाँदनी में चमके नदिया का पानी। जैसे कोई लिख दे प्रेम कहानी।। चलो नदी…
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गुरु :–
गुरु :– सच्चे गुरु ही तो बच्चों की तकदीर बनाते है। कोरे कागज पर सतरंगी तस्वीर बनाते है। …
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समर्पण
समर्पण अश्रु जल से सीच- सीच कर अपने तन मन को धोया है। पश्चाताप की अग्नि में तप कर…
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