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शीर्षक: धागा विश्वास का

शीर्षक: धागा विश्वास का

 

अंजली सामंत

 

हरियाली ने बिछाया गलीचा,

रिमझिम बरसात गा रही है प्रेम के तराने।

सावन लेकर आया त्योहारों की खुशियाँ,

भाई-बहन का पवित्र पर्व रक्षाबंधन,

अटल विश्वास और अथाह प्रेम का प्रतीक॥1॥

 

बाँधूँ धागा देश के जवानों को, शहीदों को।

बाँधूँ धागा भारतीय मूल्यों को, संस्कारों को।

बाँधूँ धागा समाज को, विश्व को मानवता का।

बाँधूँ धागा पशु-पक्षियों को, प्रकृति को अखंड रक्षा का॥2॥

 

बाँधूँ धागा पंचतत्वों को, ब्रह्मांड को चिरंतन का।

बाँधूँ धागा विश्व को मानवता, बंधुत्व और समता का।

वसुधैवकुटुंबकम् की अनंत,अखंड,अथांग विश्वास की राखी।

बाँधूँ धागा अपने महान भारत को शांति और देशभक्ति का॥3॥

 

जय हिंद ।जय भारत।

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