
मनहरण घनाक्षरी
रक्षा बंधन!
राखी पावन त्यौहार, भाई- बहन का प्यार।
अनमोल जगत में, रिश्ते को निभाइए।।
बहना राखी है लाई,भाई हाथ पहनाई।
अक्षत, रोली को लगा,मीठे गीत गाइए।।
राखी, चंदन मिठाई, सभी थाली में सजाई।
कसम लेती बहना,प्रीत को बढ़ाइए।
कभी भूल मत जाना, चाहे दूर चले जाना।
बहना के अंगना में, भैया आते जाइए।।
बैठी दीप जलाकर, आरती थाली लेकर।।
प्रभु से विनती करूँ, लंबी उम्र दीजिए।।
धागा बांध के रक्षा का, तिलक करें भाई का।
सदा खुश रहे भाई, प्रभु से मनाइए।।
ममता का नहीं मोल,बंधन है अनमोल।
रिश्ता बहुत पावन,दुआ सदा दीजिए।।
दीप मैं नित जलाती, पुष्प भी प्रभु चढ़ाती।
कष्ट सकल हरके, कृपा बरसाइए।।
स्वरचित मौलिक रचना
सुषमा सिंह*उर्मि*
कानपुर




