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बेलपत्र की महिमा

बेलपत्र की महिमा

 

समुंद्र मंथन से निकला जब, हलाहल विष का प्याला,  

शिव ने पिया जगत बचाने, कंठ हुआ था नीला।

  

तब देवों ने बेलपत्र से, किया शीतल श्रृंगार,  

तब से प्रिय है भोले को, बेलपत्र का उपहार।

 

तीन पत्ते, तीन गुण के, सत्व, रज, तम का ज्ञान,  

तीन पत्ते, तीन काल है,भूत, भविष्य, वर्तमान। 

 

तीन पत्ते, तीन देव है,ब्रह्मा, विष्णु, महेश का मान,

बेलपत्र अति पसंद भोले को, 

मिले ठंडक देदीप्यमान।

 

बेल का वृक्ष खुद में मंदिर, लक्ष्मी करते वास है,  

जड़ में ब्रह्मा, तने में विष्णु, शाखा में शिव निवास है। 

 

जिस आंगन बेल का पेड़ हो, वहां दरिद्रता नहीं आए,  

काल का भय मिट जाते, जब शिव कृपा बरसाए।

 

सोमवार हो या शिवरात्रि, जल के संग बेलपत्र चढ़ाते हैं,  

भोले एक पत्ते से भी, भक्तों पर खुश हो जाते हैं।

  

न सोना, न चांदी चाहिए, बस श्रद्धा का जल धारा,  

चांवल,दूध,बेल का पत्ता, शिव को है सबसे प्यारा ।

 

बेलपत्र तोड़ो मत व्यर्थ, वृक्ष को न कभी दुखाओ,  

श्रद्धा भाव से बेलपत्र चढ़ाकर  

भोले का आशीर्वाद पाओ।

 

त्रिनेत्र धारी को भाए,बेल के तीन पत्तों का हार,

बेलपत्र बिन पूजा अधूरा,शिव करते बेलपत्र स्वीकार।

 

शिवशंकर को बहुत पसंद है, गंगा की ठंडी धारा,

बेलपत्र संग सच्चे मन से ओम् नमः शिवाय का नारा।

 

      चन्द्रकला शर्मा  

     प्रधानाध्यापिका 

      छत्तीसगढ़

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